श्रीमद्भगवद्गीता सटीक मोटा टाइप {गीताप्रेस गोरखपुर} PDF | Shrimad Bhagavad Gita Hindi PDF Download
श्रीमद्भगवद्गीता सटीक मोटा टाइप {गीताप्रेस गोरखपुर}
मूल संस्कृत श्लोक एवं सरल हिंदी अर्थ सहित संपूर्ण 18 अध्याय | Holy Scripture
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गीता अध्ययन के मुख्य स्तम्भ | Core Pillars of Gita
कर्मयोग (Karma Yoga)
कर्म करो, फल की चिंता मत करो का शाश्वत सिद्धांत
ज्ञानयोग (Jnana Yoga)
आत्मा, शरीर और परमात्मा के सत्य का दिव्य बोध
भक्तियोग (Bhakti Yoga)
परमेश्वर के चरणों में निष्काम समर्पण और प्रेम
मोटा टाइप फॉन्ट
बुजुर्गों एवं स्वाध्यायियों हेतु पढ़ने में आसान बड़े अक्षर
श्रीमद्भगवद्गीता के बारे में | About Shrimad Bhagavad Gita
श्रीमद्भगवद्गीता सनातन धर्म का सबसे पावन और विश्वप्रसिद्ध दार्शनिक महाग्रंथ है। यह महर्षि वेदव्यास रचित विश्व के सबसे बड़े महाकाव्य महाभारत के भीष्म पर्व (अध्याय 23 से 40) का अभिन्न अंग है। कुरुक्षेत्र के पावन धर्मक्षेत्र में जब धनुर्धर अर्जुन मोह, विषाद और भ्रम से घिर गए थे, तब उनके सारथी और पथप्रदर्शक बने साक्षात् भगवान श्रीकृष्ण ने उन्हें जो अमृतमय उपदेश दिया, वही 'श्रीमद्भगवद्गीता' के नाम से अमर हुआ।
यह संस्करण गीताप्रेस गोरखपुर द्वारा प्रकाशित "सटीक मोटा टाइप" है। इसमें मूल संस्कृत श्लोकों के साथ-साथ उनका सुगम, प्रामाणिक और शुद्ध हिंदी अनुवाद दिया गया है ताकि सामान्य पाठक भी जीवन प्रबंधन के इन सूत्रों को सरलता से आत्मसात कर सकें।
संपूर्ण 18 अध्यायों की सूची (Chapters Index):
- अध्याय 1: अर्जुनविषादयोग (अर्जुन का मोह और मानसिक द्वंद्व)
- अध्याय 2: सांख्ययोग (आत्मा की अमरता और कर्मयोग का उपदेश)
- अध्याय 3: कर्मयोग (यज्ञ, कर्तव्य और निष्काम कर्म)
- अध्याय 4: ज्ञानकर्मसंन्यासयोग (अवतार रहस्य और ज्ञान-यज्ञ)
- अध्याय 5: कर्मसंन्यासयोग (त्याग और कर्म में सामंजस्य)
- अध्याय 6: आत्मसंयमयोग / ध्यानयोग (मन की एकाग्रता और ध्यान की विधि)
- अध्याय 7: ज्ञानविज्ञानयोग (ईश्वर की परा और अपरा प्रकृति)
- अध्याय 8: अक्षरब्रह्मयोग (अंतिम समय का चिंतन और मुक्ति मार्ग)
- अध्याय 9: राजविद्याराजगुह्ययोग (सर्वश्रेष्ठ परम गोपनीय ज्ञान)
- अध्याय 10: विभूतियोग (संसार में परमात्मा की दिव्य विभूतियां)
- अध्याय 11: विश्वरूपदर्शनयोग (भगवान श्रीकृष्ण का विराट रूप दर्शन)
- अध्याय 12: भक्तियोग (सगुण और निर्गुण भक्ति की महिमा)
- अध्याय 13: क्षेत्र-क्षेत्रज्ञविभागयोग (शरीर और आत्मा का विवेक)
- अध्याय 14: गुणत्रयविभागयोग (सत्त्व, रज और तम तीनों गुणों का विश्लेषण)
- अध्याय 15: पुरुषोत्तमयोग (संसार रूपी अश्वत्थ वृक्ष और परम पुरुष)
- अध्याय 16: दैवासुरसम्पद्विभागयोग (दैवी और आसुरी प्रवृत्तियों का भेद)
- अध्याय 17: श्रद्धात्रयविभागयोग (आहार, यज्ञ, तप और दान के तीन भेद)
- अध्याय 18: मोक्षसंन्यासयोग (समस्त गीता का सार और अंतिम शरणागति)
नोट: यह डिजिटल पुस्तक विशुद्ध रूप से लोक कल्याण, स्वाध्याय और धार्मिक अध्ययन के लिए साझा की गई है ताकि प्रत्येक जिज्ञासु तक यह पावन ज्ञान निःशुल्क पहुँच सके।
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